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Tuesday, April 30, 2013

दिगंबर जैन मुनि श्री निर्भय सागर जी महाराज से अभद्रता और मारपीट


आगरा। २९ अप्रैल २०१३. दिगंबर जैन मुनि श्री निर्भय सागर जी महाराज से अभद्रता और मारपीट पर आगरा के एत्‍मादपुर कस्‍बे में साम्‍प्रदायिक तनाव उत्पन्न हो गया। सैंकड़ों लोग एक दूसरे पर भिड़ गए। राष्ट्रिय राजमार्ग 2 अराजकता का अखाड़ा बन गया।

आक्रोशित लोगों ने एक दर्जन से अधिक बसें तोड़ दी। राज्य परिवहन की एक बस में आग लगा दी। पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो भगदड़ मच गई। आठ लोग बुरी तरह घायल हो गए। रात साढ़े सात बजे से 12 बजे तक राजमार्ग 2 पूरी तरह जाम रहा। आगरा - कानपुर के बीच आवागमन ठप हो गया। रात को पुलिस कड़ाई से पेश आई और तब माहौल शांत हुआ।

घटना की शुरुआत शाम करीब सात बजे आगरा से 20 किलोमीटर दूर एत्‍मादपुर इलाके में हुई। दिगंबर जैन मुनि निर्भय सागर बरहन से पैदल विहार कर संघ के साथ एत्‍मादपुर आ रहे थे। ऊंट वाले मौहल्ले के पास सुतुरवान बस्ती में एक दुकान पर बैठे एक सम्‍प्रदाय विशेष (मुसलमान) के कुछ युवकों ने छींटाकशी की। मुनि के साथ चल रहे लोगों ने विरोध किया। इसके बाद इस पर युवक भड़क गए। मुनि और संघ से खींचतान और मारपीट की। हमले में संजय जैन, यशू जैन, विनय जैन और अजय जैन घायल हो गए। मुनि और यात्रा में शामिल लोगों ने दौड़कर मौहल्ला जैनगंज में जाकर जान बचाई।

यह खबर शाम साढ़े आठ बजे तक आग की तरह आगरा और फिरोजाबाद जिले में फैल गई। आक्रोशित लोग मुनि महाराज के समर्थन में एत्‍मादपुर पहुंच गए। लेकिन यहां पहले से मौजूद अराजकतत्‍वों (मुस्लिमों) ने उनकी पिटाई कर दी। इसके बाद देखते ही देखते जैन समाज के सैंकड़ों लोग पहुंच गए। अब माहौल साम्‍प्रदायिक तनाव और दंगे में बदल गया। दोनों तरफ से मोर्चाबंदी हो गई। पत्‍थरबाजी के बाद यहां पुलिस पहुंची।






अराजक तत्‍वों ने पुलिस के साथ भी हाथापाई की। इसके बाद पुलिस पीछे लौट गई। अब आक्रोशित जैन समाज के लोग राजमार्ग 2 पर पहुंच गए। रात करीब साढ़े आठ बजे थाने को घेर लिया। इसके बाद आगरा-कानपुर राजमार्ग जाम  हो गया। गुस्‍साए लोगों ने कासगंज डिपो की एक रोडवेज बस घेर ली। बस में चीख-पुकार मच गई। सवारियां उतर कर भागीं। उग्र भीड़ ने फिर खाली रोडवेज बस को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद कई थानों की फोर्स आलाधिकारी के साथ यहां पहुंची।

तब तक करीब एक दर्जन बसों में तोड़-फोड़ की जा चुकी थी। यात्री जानबचाकर भाग रहे थे। पुलिस ने लाठीचार्ज करके आक्रोशित भीड़ तितर-बितर किया और हालात पर काबू पाया। राजमार्ग 3 पर एक ओर टूंडला तक और दूसरी ओर रामबाग तक वाहनों की कतारें लगी हुई थीं।

एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने बताया कि जैन मुनि के साथ अभद्रता, मारपीट करने वाले और बाद में उपद्रवियों को पकड़ने की कार्रवाई चल रही है। ऐसे लोगों पर राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून के तरह कार्रवाई होगी।

Friday, January 4, 2013

जैन मुनि पर हमला: अहिंसक जैन समाज में आक्रोश


गुजरात : दिगंबर जैन मुनि पर प्राणघातक हमला, दो श्वेताम्बर मुनियों को ट्रक ने कुचला
इन दुर्घटनाओं के विरोध में जैन समाज ने की बोरीवली में आपात बैठक

मुंबई
२ जनवरी २०१३। जैन धर्मावलंबियों के लिए नववर्ष दुखद घटनाएँ लेकर आया है. एक दुर्घटना गिरनार, जूनागढ़ की है तो दूसरी भरूच की है. इन दुर्घटनाओं के विरोध में जैन समाज ने की बोरीवली में आपात बैठक का आयोजन किया, जिसमें बृहत् मुंबई के सभी उपनगरों एवं दक्षिण मुंबई से काफी संख्या में समाज के गणमान्य सदस्यों एवं श्रावकों ने भाग लिया. 

जैन मुनि पर हुए हमले के विरोध में सम्पूर्ण जैन समाज आगामी 7 जनवरी  २०१३ को प्रातः ९ बजे से हीरा बाज़ार से आजाद मैदान तक मुंह पर काली पट्टियां बांधकर विरोध रैली निकालेगा और प्रधानमंत्री/राष्ट्रपति एवं गुजरात के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन महाराष्ट्र के राज्यपाल को सौंपा जाएगा । 

ज्ञात हो कि 1 जनवरी को सायं ६ बजे मुनिश्री प्रबल सागर जी महाराज सिद्धक्षेत्र गिरनार (गुजरात) में पांचवी टोंक (कमल कुण्ड) से वापसी कर रहे थे, तब कुछ असामाजिक तत्वों एवं स्थानीय पंडों द्वारा मुनिश्री पर चाकुओं से प्राणघातक हमला किया गया, इसमें मुनिश्री के पेट में ५ घहरे घाव हुए और काफी रक्त बहता रहा जिससे मुनि तुरंत बेहोश हो गए. घायल अवस्था और कडाके की ठिठुरती ठण्ड में भी दिगंबर मुनि घंटों पहाड़ पर ही पड़े रहे, रात को करीब १ बजे उन्हें पालकी वालों ने पहाड़ से नीचे उतारा और फिर रोगिवाहिका से जूनागढ़ के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहाँ उनका ऑपरेशन हुआ पर अभी भी उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है.

ध्यान दें कि दिगंबर मुनि दीक्षा लेने के बाद कभी भी किसी प्रकार के वाहन का इस्तेमाल नहीं करते और ना ही रात्रिकाल में एक स्थान से दूसरे स्थान पर गमन करते हैं. दिन में एक बार ही आहार-जल ग्रहण करते हैं. सभी जीवों के प्रति करुणा से ओतप्रोत होते हैं. हमेशा पैदल ही विहार करते हैं और सर्दी-गर्मी अथवा बरसात में भी किसी प्रकार के आवरण का इस्तेमाल नहीं करते. मयूरपंख से बनी पिच्छिका एवं कमंडल के अलावा कोई भी वस्तु अपने साथ नहीं रखते और रोगी होने पर भी चिकित्सालय में जाकर उपचार नहीं लेते हैं. यह सब उनकी दीक्षा के प्राथमिक नियम होते हैं. इस घटनाक्रम से मुनिश्री की दीक्षा का विच्छेद हो गया है क्योंकि उन्हें बेहोश अवस्था में ही रात के समय अस्पताल में भर्ती कर दिया गया. जैनधर्म के इतिहास में यह दुर्घटना काले अध्याय के सामान है जिसे कभी समाज भुला नहीं सकता.

गिरनार तीर्थ पर जैनों और समाजकंटकों के बीच पिछले १५ वर्षों से विवाद चल रहा है जबकि मूल रूप से यह जैन तीर्थ जैनधर्म के २२ तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान् की निर्वाण स्थली है. जिसपर समाजकंटकों ने जबरन कब्ज़ा कर रखा है जो हमेशा जैन तीर्थ यात्रियों को धमकाते रहते हैं, अभद्र व्यवहार करते हैं. गुजरात उच्च न्यायालय ने २१  दिसम्बर २००४ में गिरनार जी की पांचवी टोंक पर से अनधिकृत कब्जा और गैर-क़ानूनी रूप से स्थापित दत्तात्रय की मूर्ति को २८ दिसम्बर २००४ तक हटाने के आदेश दिए थे और यह भी आदेश दिए गए थे कि २८ दिसम्बर २००४ तक न हटाये जाने पर सम्बंधित विभागों को जबरन हटाने हेतु आदेश दिए जायेंगे! 

लेकिन मार्च
२००५ में हाई कोर्ट ने अपने २१  दिसम्बर २००४ के आदेश को बदलते हुए नए आदेश में भविष्य में पांचवी टोंक पर किसी भी नए निर्माण पर रोक लगा दी थी और एक कमेटी का गठन किया जिसे इस विषय में सारी जानकारी इकट्ठी करके अगले ६ महीनों में (मतलब नवम्बर, २००५ तक)..गुजरात उच्च न्यायालय को सौंपना था.
 
साथ ही इसी दिन
भरूच (गुजरात) के पास  पास राष्ट्रीय राजमार्ग ८  पर मंगलवार  को दो श्वेताम्बर जैन साधुओ  श्री ज्ञानेश्वर विजय महाराज और श्री हस्तिगिरी विजय  महाराज  को विहार के समय ट्रक से कुचला गया और वे घटनास्थल पर ही देवगति को प्राप्त हुए। ट्रक चालक दुर्घटना के बाद मौके से भाग निकले. गुजरात में पिछले २० दिनों में ऐसी १० घटनाएं हो चुकी हैं. जिनकी जाँच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए. भारत सरकार एवं गुजरात सरकार से ट्रक चालक को गिरफ्तार कर उस पर कानूनी कार्यवाही करने की मांग की।

मुनि पर इस हुए हमले की समस्त ने जैन समाज घोर निन्दा कर हमलावरों को गिरफ्तार कर उस पर कठोरतम कानूनी कार्यवाही करने एवं गिरनार तीर्थ पर पुलिस व्यवस्था कड़ी करने की मांग की।


Wednesday, January 2, 2013

चलो गिरनार: अभी नहीं तो कभी नहीं - हमारे तीर्थ/मंदिर और साधुओं को सुरक्षा दो, वर्ना गद्दी छोड़ो


[ घटना १: गुजरात के गिरनार पर्वत दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पर १ जनवरी २०१३ को मुनिश्री १०८ प्रबल सागर जी महाराज पर पंडों द्वारा चाकुओं से प्राणघातक हमला, मुनि गंभीर, मुनि दीक्षा का हुआ विच्छेद, अस्पताल में करना पड़ा भर्ती.

घटना २: भड़ूच में दो श्वेताम्बर मुनियों की ट्रक से कुचलकर नृशंस हत्या कर दी गयी, जैन संघ के लिए ये दोनों घटनाएँ शोक लेकर आई हैं २०१३ का क्या है भविष्य)

देश के हर प्रदेश की जैन संस्थाएँ एक तारीख सुनिश्चित करके गिरनार और गुजरात की राजधानी ‘गांधीनगर में एक विशाल निकालें और गिरनार के पहाड़ पर कब्ज़ा करना चाहिए

जैन तीर्थों और जैन मुनियों की सुरक्षा एवं जैनों को अखिल भारतीय स्तर पर ‘अल्पसंख्यक’ दर्जे की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय  में तुरंत एक जनहित याचिका दाखिल की जानी चाहिए.

भारत की विकास दर और कर चुकाने के मामले में जैन समाज का योगदान सबसे ऊपर है फिर भी सरकार हमारे लिए कुछ नहीं करती, हमारे मुनियों और तीर्थों पर हमलों की घटनाएँ हर दिन बढ़ रही हैं .

क्या हम अंधे, बहरे और लाचार हो गये है, कि हमे भिखारी समझा जा रहा है? या फिर हम एक अनचाहा अंग है भारत का? क्या भारत के अजैन जैनोंसे इतने असुरक्षित हैं कि उनपर, उनके तीर्थों और उनके आराध्य मुनियों पर हमले करना, उन्हें कुचलना ही एक बहुसंख्य समाज का आखरी रास्ता बचा है?

देशभर के सभी जैन व्यापारी चाहे दिगंबर हो या श्वेताम्बर एक दिन नक्की करो और उस दिन अपनी दुकानें, कम्पनियाँ, कारखाने, जैन सीए/सीएस/डॉ./वकील/इंजीनियर आदि के दफ्तर पूरी तरह बंद कर दो.
जब तक हम जैन  देशव्यापी व्यवसाय बंद नही करेंगे तब तक यह सरकार जागने वाली नही है।

जैनों के प्रतिनिधि मंडल देश की हर राजनीतिक पार्टी के अध्यक्षों और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मिलें और ज्ञापन सौंपें. कह दो जब तक इन बातों का निराकरण नहीं हो जाता, विश्राम नहीं करेंगे. अब हमें इन सब हमलों का जवाब चाहिए. समाधान चाहिए. अब चुप नहीं बैठेंगे.